छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा प्रस्तावित नियमों का कड़ा विरोध
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा अंतरधार्मिक निकाह के संबंध में प्रस्तावित नियम, जिनमें बोर्ड से पूर्व अनुमति लेने जैसी बात कही जा रही है, अत्यंत चिंताजनक हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ऐसे प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है।
हमारा स्पष्ट मत है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को कानून के दायरे में रहते हुए अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने और अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग करने की स्वतंत्रता देता है। यदि कोई नियम इन अधिकारों का अनावश्यक अतिक्रमण करता है, तो उसकी संवैधानिक वैधता न्यायालय के समक्ष परखी जानी चाहिए।
हम यह प्रश्न उठाते हैं कि क्या किसी वैधानिक बोर्ड को ऐसा अधिकार प्राप्त है कि वह नागरिकों के वैवाहिक निर्णयों पर पूर्व अनुमति जैसी व्यवस्था लागू करे? यदि ऐसा कोई नियम बनाया जाता है, तो उसकी वैधानिकता और संवैधानिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।
हम छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के द्वारा पारित प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हैँ और ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करें तथा ऐसे निर्णयों से बचें जो समाज में भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न करें।
हम संविधान, कानून के शासन और सभी नागरिकों के समान अधिकारों में विश्वास रखते हैं तथा किसी भी ऐसे कदम का लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से विरोध करेंगे जो मौलिक अधिकारों के विपरीत प्रतीत हो।
जारीकर्ता:
शकील रिजवी
जिलाध्यक्ष, कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग
राजनांदगांव




