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बालोद वार्ड क्रमांक 19: कागजों पर बना डाला चबूतरा, जनसेवक उमेश कुमार सेन ने पकड़ी चोरी

बालोद RTI से प्राप्त दस्तावेज़ चीख-चीखकर कह रहे हैं कि वार्ड क्रमांक 19 में चबूतरे का निर्माण कराया गया और उसके नाम पर सरकारी खजाने से मोटी रकम भी निकाल ली गई। लेकिन जब जनता के हक की लड़ाई लड़ने वाले जनसेवक उमेश कुमार सेन खुद फीता और दस्तावेज लेकर मौके पर पहुंचे, तो वहां सिर्फ खाली जमीन नजर आई। जनसेवक उमेश कुमार सेन की पैनी नजरों ने इस महाघोटाले को रंगे हाथों पकड़ा कि आखिर बिना एक भी ईंट रखे चबूतरे का पूरा पैसा किसकी जेब में गया? जनसेवक उमेश कुमार सेन ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अधिकारियों की मिलीभगत और बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान किए जाने पर गंभीर सवाल दागे हैं।

वार्ड क्रमांक 15: लाखों का खर्च, पर विकास ‘लापता’ – उमेश कुमार सेन का दावा

भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। वार्ड क्रमांक 15 में भी विकास के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाने का दावा कागजों में किया गया है। स्थानीय नागरिकों को साथ लेकर जब जनसेवक उमेश कुमार सेन ने इस वार्ड का निरीक्षण किया, तो जनता का आक्रोश फूट पड़ा। जनसेवक उमेश कुमार सेन ने मौके से पाया कि जिस अनुपात में राशि स्वीकृत और आहरित की गई है, उसका 10% काम भी जमीन पर नहीं दिखता। जनसेवक उमेश कुमार सेन ने इसे सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग करार दिया है।

 

पुलिस लाइन में झूला घोटाला? ₹62,500 का एक झूला देख चौंके उमेश कुमार सेन

इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला अध्याय बालोद पुलिस लाइन परिसर में सामने आया है। यहाँ नगर पालिका अध्यक्ष निधि से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से 16 झूले लगाए गए हैं। जब गणित के हिसाब से जनसेवक उमेश कुमार सेन ने इसका आकलन किया, तो एक झूले की औसत कीमत लगभग ₹62,500 निकल कर आई! इस अकल्पनीय कीमत को देखकर जनसेवक उमेश कुमार सेन के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञ भी सन्न रह गए हैं।

जनसेवक उमेश कुमार सेन ने उठाए तीखे सवाल:

क्या इस खरीदी प्रक्रिया में टेंडर के सभी नियमों का ईमानदारी से पालन किया गया था?

क्या ₹62,500 के झूले की वास्तविक बाजार कीमत की जांच की गई थी?

जनता के पैसों की इस खुली लूट का असली मास्टरमाइंड कौन है?

जनसेवक उमेश कुमार सेन की हुंकार: “जनता के टैक्स का एक-एक रुपया वसूलेंगे”

इस पूरे मामले को पूरी ताकत से उठाने वाले और नगर पालिका के ‘कागजी महल’ को ढहाने वाले जनसेवक उमेश कुमार सेन ने साफ कर दिया है कि वह इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे। जनसेवक उमेश कुमार सेन का कहना है:

“जनता अपने खून-पसीने की कमाई से टैक्स देती है ताकि शहर का विकास हो, इसलिए नहीं कि अधिकारी और ठेकेदार मिलकर उसे कागजों पर डकार जाएं। जब तक इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हो जाती और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, मेरा संघर्ष जारी रहेगा।”

पूरे बालोद में मचा हड़कंप, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

जनसेवक उमेश कुमार सेन के इस धमाकेदार खुलासे के बाद से बालोद की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी कैमरे और सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनसेवक उमेश कुमार सेन की इस मुहिम का पुरजोर समर्थन करते हुए मांग की है कि:

पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच तत्काल शुरू हो।

सभी निर्माण कार्यों और खरीदी के मूल बिल-वाउचर सार्वजनिक किए जाएं।

जनसेवक उमेश कुमार सेन द्वारा उजागर किए गए तथ्यों के आधार पर दोषी अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।

अब देखना यह होगा कि जनसेवक उमेश कुमार सेन की इस कड़वी सच्चाई के बाद जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबाने की कोशिश की जाएगी? लेकिन एक बात तय है, जनसेवक उमेश कुमार सेन ने जनता की आंखें खोल दी हैं।

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