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बालोद – फ्लिपकार्ट को बड़ी कानूनी जीत, उपभोक्ता आयोग ने खारिज किया लाखों के मुआवजे का दावा*
बालोद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में चर्चित मामले *”कृष्णा जैन Vs कल्याण कृष्ण मूर्ति (फ्लिपकार्ड के CEO)”* में फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है। आयोग ने उपभोक्ता द्वारा दायर परिवाद को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामले में फ्लिपकार्ट की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी सिद्ध नहीं हुई।
मामला एक DELL Inspiron Ryzen 5 लैपटॉप की खरीदी से जुड़ा था, जिसे उपभोक्ता ने ऑनलाइन माध्यम से खरीदा था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि लैपटॉप में तकनीकी समस्याएं थीं और बाद में उसे “रिफर्बिश्ड” होने की जानकारी मिली। इसके आधार पर परिवादी ने ₹40,990 की राशि वापसी, ₹1 लाख मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति सहित अन्य राहत की मांग की थी।
मामले में फ्लिपकार्ट की ओर से *”अधिवक्ता भेष कुमार साहू”* ने प्रभावी पैरवी करते हुए आयोग के समक्ष तर्क रखा कि फ्लिपकार्ट केवल एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, न कि उत्पाद का निर्माता अथवा प्रत्यक्ष विक्रेता। उन्होंने यह भी बताया कि उत्पाद और विक्रेता अलग इकाइयाँ हैं तथा शिकायत में फ्लिपकार्ट को गलत तरीके से पक्षकार बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, सर्विस रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के तर्कों का विस्तृत परीक्षण किया। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता फ्लिपकार्ट की ओर से सेवा में कमी या प्रत्यक्ष दोष सिद्ध करने में असफल रहा।
इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग, बालोद ने परिवाद को खारिज करते हुए फ्लिपकार्ट को राहत प्रदान की। यह फैसला ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है और ऑनलाइन मार्केटप्लेस की कानूनी स्थिति को लेकर आमजन में चर्चा का विषय है और एक अहम उदाहरण के रूप में लोगो के द्वारा देखा जा रहा है।
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