बालोद: त्योहार आते ही शहर के मुख्य बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में रौनक बढ़ गई है, लेकिन इसी के साथ एक बड़ी लापरवाही भी सामने आ रही है। बालोद शहर के बीचों-बीच घनी आबादी वाले इलाके में नियमों को ताक पर रखकर सरेआम पटाखों की बिक्री की जा रही है। शासन-प्रशासन की इस खुली अनदेखी के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे आसपास के रहवासियों और व्यापारियों में डर व दहशत का माहौल है।
नियमों की उड़ रही धज्जियां
नियमानुसार पटाखों की दुकानें या बाजार शहर के बाहर किसी खुले मैदान में लगाए जाने चाहिए, जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों। लेकिन बालोद के मुख्य बाजार और शहर के मध्य में बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के पटाखों की दुकानें सज गई हैं। इन दुकानों के पास न तो अग्निशमन (फायर फाइटिंग) के सही इंतजाम हैं और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने की कोई तैयारी।
हादसे की आशंका से सहमे लोग
घने बाजार और रिहायशी इलाके में पटाखों की बिक्री से आसपास के दुकानदार और स्थानीय निवासी बेहद चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि:
> “बाजार में लोगों की भारी आवाजाही रहती है। यदि किसी छोटी सी चिनगारी से भी आग लग जाती है, तो दमकल की गाड़ियों का अंदर आना भी मुश्किल हो जाएगा। प्रशासन सब कुछ देखकर भी अनजान बना हुआ है।”
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प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सुरक्षा के मानकों को नजरअंदाज कर बेचे जा रहे इन पटाखों पर अब तक स्थानीय प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
लोग मांग कर रहे हैं कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से शहर के बीचों-बीच चल रही पटाखों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए और इन्हें शहर से बाहर किसी सुरक्षित व खुले स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।





