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बालोद।शासन शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं लागू कर रहा है। हर बच्चों के लिए शिक्षा भी अनिवार्य की गई है। लेकिन आज भी जिले के कुछ गांव ऐसे हैं, जहां स्कूल नहीं है। ऐसा ही एक गांव डौंडीलोहारा विकासखंड की ग्राम पंचायत का आश्रित करियागोंदी है, जहां आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक शाला तक नहीं है। 145 की जनसंख्या वाले इस गांव में अधिकांश बच्चे पढ़ाई करने अपने नाना-नानी के घर या अन्य रिश्तेदारों के घर पर रहते हैं। कुछ बच्चों को उनके पालक स्कूल छोडऩे और लाने जाते हैं। स्कूल व आंगनबाड़ी खोलने की मांग कई बार ग्रामीण कलेक्टर से मिल चुके हैं और अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन कुछ नहीं हुआ।जिला शिक्षा विभाग ने यहां स्कूल खोलने सर्वे एवं महिला बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी खोलने पत्र जारी किया था, लेकिन यहां न तो स्कूल खुला और न ही आंगनबाड़ी।ग्रामीण माधवी भुआर्य ने बताया कि साल 2021 में छोटे बच्चों को गरम भोजन देने के लिए अस्थाई आंगनबाड़ी केंद्र खोला गया था, लेकिन उसे कुछ दिनों के बाद बंद कर दिया गया। लगभग 15 बच्चे हैं, जो आंगनबाड़ी जाने लायक हैं, लेकिन यहां गरम भोजन नहीं मिलता। आंगनबाड़ी केंद्र खोलना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि गर्भवती को गरम भोजन के लिए 5 किमी दूर गुरामी जाना पड़ता है।घने जंगल से होकर जाता पड़ता है स्कूल

ग्राम की पंच देवकुमारी ने बताया कि घने जंगल से होकर बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है। मार्ग भी सूनसान रहता है। बारिश के दिनों में ज्यादा परेशानी रहती है। डर बना रहता है, जिन बच्चों को साइकिल चलाने आता है, वे स्कूल चले जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों को अधिक परेशानी होती है।

स्कूल व आंगनबाड़ी की कर रहे मांग

ग्राम पंचायत सरपंच सेवंत नेताम ने बताया कि गांव में कई समस्या है। सबसे बड़ी समस्या यहां स्कूल व आंगनबाड़ी भवन नहीं होना है। हाल ही में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट जाकर मांग की थी। लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई है।

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