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बालोद।जिला मुख्यालय से 5 किमी दूरी पर स्थित ग्राम नेवारीकला में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह कथा के के छटवे दीन मंगलवार को पंडित कालेश्वर प्रसाद तिवारी ने श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का सुन्दर विस्तृत वर्णन सुनाया । कृष्ण-सुदामा की मित्रता की कथा सुना कर वहा उपस्थित सैकड़ों भक्तों को भाव विभोर हो गए। सुदामा की दयनीय दशा और भगवान में निष्ठा के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं।इस अवसर पर महिलाओ ने अपने अपने धरो से चावल की पोटली लेकर भागवत स्थल में पहुचे थे । कथा के दौरान कथा व्यास के बड़े भाई भगवात आचार्य महेश्वर प्रसाद तिवारी उपस्थित रहे।

कथा के दौरान महिलाओं ने सुदामा को भेट किए चावल की पोटली

सुदामा कथा के दौरान महिलाओ ने चावल की पोटली को सुदामा भेट किया गया। पंडित कालेश्वर प्रसाद तिवारी ने श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का विस्तृत वर्णन सुनाया। उन्होंने बताया कि यदि सुदामा दरिद्र होते तो अन के लिए धन की कोई कमी नहीं थी । सुदामा के पास विद्वता थी और धनार्जन तो सुदामा उससे भी कर सकते थे। मगर सुदामा पेट के लिए नहीं बल्कि आत्मा के लिए कर्म कर रहे थे । वे आत्म कल्याण के लिए उधत थे। उन्होंने कहा कि पत्नी के कहने पर सुदामा का द्वारिका आगमन और प्रभु द्वारा सुदामा के सत्कार पर श्री तिवारी ने कहा की यह व्यक्ति का नहीं व्यक्तित्व का सतकार है, यह चित की नहीं चरित्र की पूजा है । सुदामा की निष्ठा और सुदामा के त्याग का सम्मान है। कथा वाचक तिवारी ने बताया कि मित्रता में बदले की भावना का स्थान नहीं होना चाहिए। कथा वाचक श्री तिवारी ने भजनों के माध्यम से प्रभु की अतिकरूणा, कृपा वृष्टि की लीलाओं का श्रवण कर सभी श्रोता भावुक हो गए ।

कृष्ण व सुदामा की निकाली झाकी

इस दौरान कृष्ण रूखमणी,-सुदामा व् सुशीला की मनोहारी झांकी के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान कृष्ण के स्वरूप ने जैसे ही सुदामा बने स्वरूप के पैर धोए पांडाल में मौजूद श्रोता भावुक हो गए। कथा के दौरान भजनामृत की फुहार पर श्रोताओं का तन-मन झूम उठा।

श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु हुए भावविभोर

पंडित ने कहा कि भागवत सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए। श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह कथा के आयोजक व मुख्य यजमान लोकेश शर्मा,पत्नी खुशबू शर्मा व परीक्षित यजमान पंकज शर्मा की पत्नी  प्रियंका शर्मा सहित ग्राम की महिलाए व पुरुष बड़ी सख्या में शामिल होकर कथा का अमृतमय रसपान करते हुए पुण्य लाभ ले रहे है।

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