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बालोद।बालोद ब्लाक के ग्राम नेवारीकला में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित कालेश्वर प्रसाद तिवारी ने राजा परीक्षित जन्म और बारहवतार का प्रसंग सुनाया। इस दौरान कथा में कई गांवों के भक्त मौजूद रहे।पंडित कालेश्वर तिवारी ने कहा कि भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों में वराह अवतार को तीसरा अवतार माना जाता है। वराह अवतार सतयुग में हुआ था जिसका उद्देशय धरती पर पापियों का अंत करके धर्म की स्थापना करना था। अपने तीसरे अवतार में श्री हरि विष्णु ने वराह का रुप धारण कर दैत्य हिरण्याक्ष के पापों से पृथ्वी को मुक्त कराया था और पृथ्वी को रसातल से निकाल नक वापस अपनी जगह स्थापित किया थाष पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु का ये अवतार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था, इसलिए इन दिन को अब वराहजयंती के रूप में मनाया जाता है। पंडित कालेश्वर प्रसाद तिवारी ने कहा कि मरीचि के पुत्र कश्यप मुनि से, एक बार शाम के समय मरीचि के पुत्र कश्यप मुनि भगवान की पूजा कर रहे थे, तभी उनकी पत्नी और दक्ष प्रजापति की बेटी दिति काम इच्छा लेकर उनके पास पहुंची। इस पर मुनि ने उन्हें समझाया कि ये समय इस कार्य के लिए ठीक नहीं है और तुम्हें एक प्रहर इंतजार करना चाहिए, इस समय काम की इच्छा से संतान असुरी प्रवृति की होती है। लेकिन काम वासना से लिप्त दिति ने पति की बात नहीं मानी और मुनि ने इसे भगवान की इच्छा मानकर दिति की बात मान ली। कुछ देर बाद मुनि कश्यप ने पुन: स्नान किया और संध्या वंदन करने लगे। फिर एक पहर बाद अपनी पत्नी से बोले की तुमने मेरी बात नहीं मान कर असमय जो कार्य करवाया है, उसका परिणाम बहुत भयंकर होगा। तुम्हारे गर्भ से दो असुरों का जन्म होगा जो महापापी और अधर्मी होंगे और उनसे संसार की रक्षा करने के लिए स्वयं भगवान विष्णु उनका वध करेंगे। श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह कथा के आयोजक मुख्य यजमान पंडित लोकेश शर्मा उनकी पत्नी श्रीमती भुनेश्वरी शर्मा व परीक्षित यजमान पंकज शर्मा उनकी पत्नी प्रियंका शर्मा सहित बड़ी सख्या में ग्रामीण शामिल रहे।



