बालोद जिले में अवैध खनन पहले से ही एक गंभीर मुद्दा रहा है, और अब बिना अनुमति के बोर (बोरवेल) खनन की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

जिले में बोर खनन पर पहले से नियंत्रण/प्रतिबंध लगाया गया है और किसी भी निजी बोरिंग के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी होती है।
इसके बावजूद कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर बोर खनन किए जाने की शिकायतें मिलती रही हैं।
बालोद में पहले भी अवैध रेत खनन और मशीनों से खनन जैसे मामलों में नियमों का उल्लंघन सामने आया है, जिससे साफ है कि खनन गतिविधियों में निगरानी की चुनौती बनी हुई है।
हाल ही में प्रशासन ने अवैध खनन पर कार्रवाई करते हुए वाहनों की जब्ती और जांच अभियान भी चलाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि समस्या अभी भी जारी है।
सूत्रों से पता चला है कि प्रशांत ठाकुर अर्जुंदा वाले की गाड़ी लगी है
अब देखना यह है कि इस पर कार्यवाही होती हैं कि पैसे लेकर मामला दबा दिया जाएगा
समस्या क्यों गंभीर है?
भूजल स्तर तेजी से गिरा हुवा है
किसानों और आम लोगों के पानी पर असर
बिना अनुमति बोरिंग से पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन
प्रशासन की अनुमति प्रणाली कमजोर पड़ती है
क्या कार्रवाई हो सकती है?
खनिज विभाग और प्रशासन द्वारा जांच व सीलिंग
मशीन/वाहन जब्ती
संबंधित लोगों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं आम जनता की नजर बनी हुई है




